विश्व हिंदी दिवस
विश्व हिंदी दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है।
उद्देश्य:
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हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना
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विश्वभर में हिंदी के उपयोग, सम्मान और महत्व को प्रोत्साहित करना
इतिहास:
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10 जनवरी 1975 को नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था
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उसी स्मृति में यह दिन मनाया जाता है
भारत में महत्व:
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यह दिन विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों द्वारा विशेष रूप से मनाया जाता है
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कवि सम्मेलन, संगोष्ठियाँ, निबंध प्रतियोगिताएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं
हिन्दी के तथ्य
- हिंदी शब्द फारसी शब्द 'हिंद' से लिया गया है। इसका अर्थ है सिंधु नदी की भूमि।
- पहला हिंदी जर्नल 2000 में प्रकाशित हुआ था। यह वर्ल्ड वाइड वेब पर हिंदी भाषा की पहली उपस्थिति थी।
- उर्दू को प्रतिस्थापित करते हुए हिंदी को अपनी आधिकारिक भाषा घोषित करने वाला भारत का पहला राज्य बिहार था।
- विश्वभर में लगभग 60 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिंदी है।
- 1977 में अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी भाषा के प्रति गर्वपूर्वक सम्मान प्रदर्शित करते हुए संयुक्त राष्ट्र में हिंदी भाषा में भाषण दिया था।
- न्यूजीलैंड, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, युगांडा, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, बांग्लादेश, त्रिनिदाद, टोबैगो और पाकिस्तान में हिंदी भाषा बोली जाती है।
- कई हिंदी शब्द जो अक्सर बोले जाते हैं जैसे 'अच्छा' और 'सूर्य नमस्कार' को ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में शामिल किया गया है।
- प्रख्यात कवि अमित खुसरो पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने हिंदी में पहली कविता की रचना की और उसे प्रकाशित किया।
- 26 जनवरी, 1950 को संसद के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी भाषा को प्राथमिक भाषा माना गया था।
- पहले हिंदी टाइपराइटर 1930 के दशक में बनाए गए थे।
यहाँ हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण एवं प्रसिद्ध पुस्तकें कालखंड और विधा के अनुसार दी जा रही हैं:
प्राचीन / भक्ति काल
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रामचरितमानस – गोस्वामी तुलसीदास
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सूरसागर – सूरदास
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बीजक – कबीरदास
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पदावली – मीराबाई
रीतिकाल
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बिहारी सतसई – बिहारीलाल
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रसिकप्रिया – केशवदास
आधुनिक काल – कविता
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कामायनी – जयशंकर प्रसाद
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साकेत – मैथिलीशरण गुप्त
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यामा – महादेवी वर्मा
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मधुशाला – हरिवंश राय बच्चन
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रश्मिरथी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’
आधुनिक काल – उपन्यास
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गोदान – मुंशी प्रेमचंद
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गबन – मुंशी प्रेमचंद
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निर्मला – मुंशी प्रेमचंद
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मैला आँचल – फणीश्वरनाथ रेणु
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राग दरबारी – श्रीलाल शुक्ल
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आषाढ़ का एक दिन – मोहन राकेश
कहानी / नाटक
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कफन – मुंशी प्रेमचंद
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पूस की रात – मुंशी प्रेमचंद
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अंधायुग – धर्मवीर भारती
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आधे-अधूरे – मोहन राकेश
निबंध / आलोचना
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कलम का सिपाही – अमृत राय
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साहित्य का इतिहास – आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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